Saturday, 15 August 2015

Celebrating Independence Day!

chalo kuch nahi toh azadi ka jashn mana lein
har saal jo karte aaye wo iss saal bhi dohra lein

unhattar saal ke ho gaye lekin bachpana nahi gaya
kuch din hue tumne hotel se kuch logon ko utha liya
unko police station mein pared karwayi, beizzat kiya
azadi ka toh tumne ye khoobsurat gul khila diya

mike pe diye bhasando ko nazarandaaz kar dete ho
facebook pe comment se tumne giraftaar kar liya
mere pahanaawe ko sanskriti pe khatra bana diya
azadi ka toh tumne ye khoobsurat gul khila diya

maine kisko pyar ke liye chuna uspe bhi aitraaz hai
kanoon mein usko jurm ka jaamaa pahna diya
kahne ko bahut kuch hai lekin kya kya kahun main
azadi ka toh tumne ye khoobsurat gul khila diya

chalo kuch nahi toh azadi ka jashn mana lein
har saal jo karte aaye wo iss saal bhi dohra lein






Sunday, 10 August 2014

तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते / फ़राज़

तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते हैं
तो ख़्यालों में बहुत दूर निकल जाते हैं

गर वफ़ाओं में सदाक़त भी हो और शिद्दत भी
फिर तो एहसास से पत्थर भी पिघल जाते हैं

उसकी आँखों के नशे में हैं जब से डूबे
लड़-खड़ाते हैं क़दम और संभल जाते हैं

बेवफ़ाई का मुझे जब भी ख़याल आता है
अश्क़ रुख़सार पर आँखों से निकल जाते हैं

प्यार में एक ही मौसम है बहारों का मौसम
लोग मौसम की तरह फिर कैसे बदल जाते हैं

Saturday, 2 August 2014

BAAD MUDDAT UNHE DEKHKAR YUN LAGA/ ALI SARDAR ZAFARI

बाद मुद्दत उन्हें देख कर यूँ लगा
जैसे बेताब दिल को क़रार आ गया

आरज़ू के गुल मुस्कुराने लगे
जैसे गुलशन में बहार आ गया

तिश्न नज़रें मिली शोख नज़रों से जब
मैं बरसने लगी जाम भरने लगे

साक़िया आज तेरी ज़रूरत नहीं
बिन पिये बिन पिलाये खुमार आ गया

रात सोने लगी सुबह होने लगी
शम्म बुझने लगी दिल मचलने लगे

वक़्त की रोश्नी में नहायी हुई
ज़िन्दगी पे अजब स निखार आ गया

Tuesday, 15 July 2014

A Beautiful Ghazal by "Ali Sardar Zafari"

मेरी वादी में वो इक दिन यूँ ही आ निकली थी
रंग और नूर का बहता हुआ धारा बन कर

महफ़िल-ए-शौक़ में इक धूम मचा दी उस ने
ख़ल्वत-ए-दिल में रही अन्जुमन-आरा बन कर

शोला-ए-इश्क़ सर-ए-अर्श को जब छूने लगा
उड़ गई वो मेरे सीने से शरारा बन कर

और अब मेरे तसव्वुर का उफ़क़ रोशन है
वो चमकती है जहाँ ग़म का सितारा बन कर