Sunday, 3 November 2013

Diwali




दीयों की लड़ियों से सजे दरवाजे पर


किसी ने दस्तक दी


दरवाज़ा खोला तो ख़ुशी चुपचाप खड़ी थी


मैंने अपने पांच दीयों की रौशनी में देखा


दो दिए उसकी डबडबाई आँखों में जल रहे थे


 


शायद उसे मेरे घर के रास्ते में


कई घरों में अँधेरे मिले होंगे


उसे देख कर मैंने सोचा मेरी ख़ुशी


इतनी उदास नहीं हो सकती


और न तो मैं इतना सीमित


 


मैंने अपने घर के पांच दीयों में से


दो दिए उठाये


और अँधेरे में डूबे दो दरवाज़ों पे रख दिया


मेरे दरवाज़े पे खड़ी ख़ुशी के चेहरे पर


मुस्कान आ गयी , थोड़ी सी सही  


 


-    अनिल